संगीतकार रवि: इस भरी दुनिया में कोई हमारा ना हुआ
राजेंद्र बोड़ा हिन्दुस्तानी फिल्मों में अनगिनत संगीतकार हुए हैं जिनके सुरों के संयोजन के अपने अंदाज़ थे अपनी अलग पहचान थी। मगर गिनने बैठें तो बहुत कम ऐसे संगीतकार पाये जाएंगे जिनके गानों ने “कल्ट” गीत की ऊंचाइयों को छुआ। ऐसे कालजयी गीतों की रचना करने वालों में रवि का नाम बहुत ऊंची पायदान पर आता है। गत सात मार्च को होली के दिन काल ने उन्हें हमसे छीन लिया। मगर अपने सुरीले फिल्म संगीत से उनहों ने तो अमरत्व पा लिया था। अपने नश्वर शरीर के नहीं होने पर भी वे अपने संगीत में हमेशा हमारे साथ रहेंगे। वे अपने जमाने के वे सफलतम संगीतकार रहे। आम तौर पर किसी फिल्म के सभी गाने सुपर हिट नहीं होते। मगर वे ऐसे संगीतकार रहे जिनकी अनेकों फिल्मों के सारे के सारे गाने सुपरहिट हुए। जैसे ‘चौदहवीं का चांद’ (1960), ‘गुमराह’ (1963), ‘वक्त’ (1965), ‘दो बदन’ (1966), ‘हमराज़’ (1967) आदि। दिल्ली में तीन मार्च 1926 को जन्मे और बड़े हुए रविशंकर शर्मा गायक बनने का जुनून लेकर 1950 में सिने नगरी मुंबई पहुंचे थे। और कड़े संघर्ष के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपना स्थान बनाया। उनकी पहली ही फिल्म ‘वचन’ (1955) के संगी...