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मनोहारी सिंह के सेक्सोफोन का जादू कभी नहीं टूटेगा

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राजेंद्र बोड़ा सैकड़ों हिन्दी फिल्में हर साल बनती हैं। अब तक बनी हजारों फिल्मों में से कौन सी फिल्में लोगों को याद रहती हैं? ‘मुगले आज़म’ या ‘शोले’ जैसी फिल्मों को छोड़ दें तो अधिकतर फिल्में समय के अंधेरे गलियारों में खो जाती हैं। यदि कोई फिल्म याद रहती है तो वह उसके गानों से। हिंदुस्तानी फिल्म संगीत ने, खास कर गानों ने, पुरानी फिल्मों को लोगों की यादों में बचाए रखा है। यह भी होता है कि गाने याद रह जाते हैं और फिल्मों के नाम भी बिसरा दिये जाते हैं। हालांकि गानों का श्रेय गायकों, संगीतकारों और गीतकारों को मिलता है मगर गानों को सजाने संवारने में साजिन्दों का योगदान भी कम नहीं होता। आप किसी पुराने गाने को याद करते हैं तो कई बार उस गाने की शुरुआत में या उसके इंटरल्यूड में बजे किसी साज की धुन सबसे पहले आपके मन में गूँजती है। आज किसी जमाने की राजेंद्र कुमार, साधना की सुपर हिट फिल्म ‘आरजू’ की किसे याद है। याद है तो उसके गाने। उनमें भी एक गाना जो इतने बरसों के बाद आज भी लोगों के सिर पर चढ़ा हुआ है ‘बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता है’की याद आती है तो हमारे जेहन में उस वाद्य की आवाज गूँज उ...