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क्लेरिनेट नवाज़ मास्टर इब्राहिम

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राजेंद्र बोड़ा   आखिर राजस्थान के जाये क्लेरिनेट वादक मास्टर इब्राहिम पर लिखी किताब हमारे हाथ में आ ही गयी। रात उसे पूरा पढ़ भी लिया। किताब छोटी सी है , पर कहते हैं ना कि “गागर में सागर” कुछ ऐसा ही है इसमें। क्लेरिनेट के अद्भुत वादक मास्टर इब्राहिम के बारे में आपको जो जानकारी चाहिए वह इसमें उपलब्ध है।    जैसे ही पता चला कि सिनेमा के दीवाने प्रो. सुरजीत सिंह , जिनका कर्मक्षेत्र सैद्धांतिक भौतिकी रहा है , की क्लेरिनेट वादक मास्टर इब्राहिम पर लिखी किताब प्रकाशित हो कर https://store.pothi.com/.../professor-surjit-singh.../ पर उपलब्ध हो गयी हैं तो उसका तुरंत ऑर्डर किया गया और फिर इंतज़ार। और जब किताब हाथ में आई तो उस खुशी का अंदाजा कोई किताबों का रसिक ही लगा सकता है। लोक स्मृति से लुप्त मास्टर इब्राहिम ने पिछली सदी के चौथे , पांचवें और छठे दशक में लोकप्रिय फिल्मी गानों को अपने साज पर बजा कर धूम मचा रखी थी। एचएमवी ने उनके क्लेरिनेट पर बजाए फिल्मी गानों के 78 आरपीएम के सैकड़ों रिकॉर्ड जारी किए। बाद में उनके बजाए गानों के संकलन का दो सीडी का सैट भी जारी किया। रेडियो ...

लता श्रुति संवाद: सिने संगीत के स्वर्णयुग में फिर लौटना

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  राजेंद्र बोड़ा लता मंगेशकर हिंदुस्तानी फिल्म संगीत की वे एक ऐसी गायिका है किनके कंठ में वीणावादिनी निवास करती है। उन्होंने अपने जीवन में कड़ी तपस्या से एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जिसकी बराबरी शायद ही कोई कभी कर पाएगा। उनकी दोषरहित गायकी पर कभी कोई उंगली नहीं उठा सका। उन्होंने धन, यश और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न जैसा मान सभी कुछ पाया। स्वर साम्राज्ञी के रूप में पूज्यनीय लता मंगेशकर पर अनेकों पुस्तकें लिखी जा चुकी है और पत्र-पत्रिकाओं में उन पर सदा ही कुछ न कुछ छपता ही रहता है। ऐसे में उनके बारे में कोई नई किताब लिखे तो स्वाभाविक रूप से पूछा जा सकता है कि इस गायिका के बारे में और क्या नया लिखा जा सकता है? मगर अजय देशपांडे की नई पुस्तक “लता श्रुति संवाद” इस धारणा को तोड़ती है कि लता,उनकी गायकी और उनके गानों के बारे में नया और क्या लिखा जा सकता है। देशपांडे साहब ने अपनी पुस्तक में लता की शुरुआती 17 वर्षों की संगीत यात्रा का, अपनी पसंद के 100 गानों के जरिये, विद्वत्तापूर्ण विवेचन किया है। अजय देशपांडे ने 2019 में अपनी पहली पुस्तक “”कला संगम” (खंड-1) में भारतीय कला और संस्कृ...

निजता खो चुका हिंदुस्तानी सिने संगीत अब स्मृतियों में नहीं दर्ज होता

राजेंद्र बोड़ा यह सच तो सभी स्वीकार करेंगे कि देश की आम जनता में 1950 और 1960 के दशक में हिन्दुस्तानी सिनेमा के लिए जो भारी क्रेज़ उभरा उसमें उस दौर के गीत-संगीत का बहुत बड़ा योगदान रहा। फिल्मी गाने - सिनेमा के परदे पर अदाकारों के लबों पर हों या रेडियो पर बजते हों - लोगों पर जादू का सा असर करते थे। हर एक को हर गाना अपना-अपना सा लगता था। जैसे वह उसी का हाल बयान कर रहा हो। हिंदुस्तानी सिनेमा संगीत की अहमियत को जानना – पहचानना हो तो उसके लिए पिछली सदी के पांचवें और छठे दशक के सिने संगीत के दौर को टटोलना पड़ेगा। लोगों के सिर चढ़ जाने वाला संगीत ऐसी फिल्मों में भी गूंजा जो ज़्यादातर “ चवन्नी छाप ” दर्शकों के लिए मानी गयी। उस दौर के गाने हमारी स्मृतियों को जगाते हैं और एक प्रकार का नो स्टेल्जिया पैदा करते हैं। उनकी स्मृतियों में लौटना बड़ा भला-भला सा , शुभ-शुभ सा लगता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि वह देस-काल से परे ले जाने वाला संगीत था। उसमें देश के गावों और शहरों का अपनापा बोलता था। उन गानों से फ़लक का एहसास बनता था। सिने संगीत के रसिक लेखक अजातशत्रु ‘ सदियों में एक...आशा ’  मे...

गजेंद्र नारायण सिंह: संगीत को तिजारत से दूर रखने का अलख जगाने वाला नहीं रहा

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                              -- राजेंद्र बोड़ा पर्फ़ोर्मिंग आर्टिस्ट समीक्षक नहीं होते और समीक्षक पर्फ़ोर्मिंग आर्टिस्ट नहीं होते। मगर गजेंद्र नारायण सिंह विलक्षण रूप से ये दोनों थे। वे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के कलाविद् होने के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत के समीक्षक और इतिहासकार भी थे। उनका यह बहुआयामी व्यक्तित्व उन्हें भीड़ से अलग करता था। ऐसे गुणवंत कलाकार , पारखी समीक्षक और भारतीय संगीत को बढ़ावा देने में हमेशा जुटे रहने वाले गजेंद्र नारायण सिंह के सोमवार को पटना में निधन से भारतीय संगीत प्रेमियों में शोक है।       10 दिसंबर 1939 को एक संभ्रांत बिहारी परिवार में जन्मे सिंह को बचपन से ही संगीत का जुनून रहा और उन्होंने 18 वर्षों तक गुरु- शिष्य परंपरा में संगीत का कडा प्रशिक्षण ग्वालियर घराने के सुविख्यात गायक चूड़ा मणि और पद्मविभूषण पंडित विनायक बुआ पटवर्धन से जैसों से पाया। कथकली के जाने माने विद्वान केलू नाय र इनके नृत्य गुरु रहे। उन्हों ने पंडित नारायण राव व्यास , ...