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Showing posts from July, 2011

कराख रो तो जल भलो: मगर जल से रिश्ता फिर कैसे बने

राजेन्द्र बोड़ा सदियों से राजस्थान के लोग पानी की कमी का सामना करते रहे हैं। एक तो यहां का गर्म जलवायु, दूसरी तरफ वर्षा की हमेशा कमी और तीसरे कोई बारहमासी नदी नहीं होना। साथ ही बड़ा भू भाग रेगिस्तानी या अर्द्धशुष्क। मगर प्रकृति से मिली ऐसी कठोर परिस्थितियों में भी यहां जो कला, संस्कृति, तथा जीवन शैली पल्लवित हुई और मानवीय मूल्यों का विकास हुआ वह अनोखा है। यहां के लोगों ने प्राकृतिक विपदा में भी अपने जीवन को उत्सव बनाया। अपने अनुभवों से उन्होंने प्रकृति से सहकार करना सीखा और पीढ़ी दर पीढ़ी अपने अनुभवों से नया ज्ञान पाने और उसे आगे बढाने की परंपरा डाली। जहां वर्षा के देवता इंद्र की मेहरबानी कम होती हो वहां संस्कृति, सामाजिक ढांचा और परंपरा कम पानी में गुजारा करना सिखाते हैं और वैसे ही मानवीय मूल्य प्रतिष्ठित करते हैं। राजस्थान के लोगों ने कभी पानी की कमी का रोना नहीं रोया। जितना प्रकृति ने दिया उसी को प्रसाद मान कर शिरोधार्य किया। हालांकि पानी की कमी से होने वाली मानवीय तकलीफें यहां के लोक गीतों और संगीत में गूंजी मगर वे दुःख के नहीं उत्सव के स्वर थे। महाभारत युद्ध जब समाप्त सोने

प्रवीणजी भाई साहब : आध्यात्मिक गहराई से लेखन करने वाले पत्रकार

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राजेंद्र बोड़ा राजस्थान के पत्रकार जगत में एक नाम अपनी अलग पहचान रखता है और विशिष्ठ स्थान भी रखता है। यह नाम है प्रवीण चंद छाबड़ा। अपने दोस्तों और सहयोगियों के बीच गहरे अपनत्व से प्रवीण जी भाई साहब के नाम से पुकारे जाने वाले प्रवीण चंद छाबड़ा उन पत्रकारों में से हैं जो देश की आज़ादी और वर्तमान राजस्थान के बनने से पहले से सामाजिक क्षेत्र और पत्रकारिता में सक्रिय हैं। यह हमारा सौभाग्य हैं कि पैसठ सालों की सक्रिय पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र के कामों के अपने गहरे अनुभव रखने वाले प्रवीण जी भाई साहब का सानिध्य और आशीर्वाद आज उनके 82वें जन्म दिन पर हमें प्राप्त है। प्रवीण जी भाई साहब ने राजस्थान का निर्माण होते हुए ही नहीं देखा है बल्कि उसके बनने की प्रक्रिया और उस के बाद से अब तक का समूचा राजनैतिक घटनाक्रम पत्रकार के रूप में बहुत नज़दीक से और बहुत गहराई से देखा है। इसीलिए आप नए राजस्थान बनने की राजनीतिक प्रक्रिया को समझने और उसे विश्लेषित करने की दृष्टि पाने में नयी पीढ़ी के पत्रकारों को रोशनी दिखाने में सक्षम हैं। प्रवीण जी के लेखन में एक अद्भुत आध्यात्मिक गहराई है। इसलिए कई